अपनी सूरत का कभी तो दीदार दे,
तड़प रहा हूँ अब और न इंतज़ार दे,
अपनी आवाज नहीं सुनानी तो मत सुना,
कम से कम एक मिस काल ही मार दे।
अपनी सूरत का कभी तो दीदार दे,
तड़प रहा हूँ अब और न इंतज़ार दे,
अपनी आवाज नहीं सुनानी तो मत सुना,
कम से कम एक मिस काल ही मार दे।
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