कागज की कश्ती से पार जाने की ना सोच,
उड़ते हुए तूफानों को हाथ लगाने की ना सोच,
ये मोहब्बत बड़ी बेदर्द है इससे खेल ना कर,
मुनासिब हो जहाँ तक दिल बचाने की सोच।
कागज की कश्ती से पार जाने की ना सोच,
उड़ते हुए तूफानों को हाथ लगाने की ना सोच,
ये मोहब्बत बड़ी बेदर्द है इससे खेल ना कर,
मुनासिब हो जहाँ तक दिल बचाने की सोच।
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