कितना इख़्तियार था उसे अपनी चाहत पर,
जब चाहा याद किया जब चाहा भुला दिया,
जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके,
जब चाहा हँसा दिया जब चाहा रुला दिया।
कितना इख़्तियार था उसे अपनी चाहत पर,
जब चाहा याद किया जब चाहा भुला दिया,
जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके,
जब चाहा हँसा दिया जब चाहा रुला दिया।
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